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संसद मार्च में लाठीचार्ज: हिमाचल के कई युवा घायल, हिरासत और पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज में हिमाचल के कई छात्र-युवा घायल होने का दावा
ठियोग की छात्रा शरण्या वर्मा ने हिरासत में लिए जाने की बात कही
शिमला में भी छात्रों पर कार्रवाई के विरोध में शांतिपूर्ण धरना, न्यायिक जांच की मांग


नई दिल्ली में संसद मार्च के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई की गूंज अब हिमाचल प्रदेश तक पहुंच गई है। प्रदर्शन में शामिल प्रदेश के कई छात्र-युवाओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इस घटना के बाद अभिभावकों में चिंता का माहौल है और वे अपने बच्चों से लगातार संपर्क कर उनका हालचाल जानने में जुटे हैं।

जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर पर आयोजित संसद मार्च में देशभर के युवाओं के साथ हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से भी बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में कई छात्रों को चोटें आने की बात कही जा रही है। इनमें राजधानी शिमला की पूर्व भाजपा पार्षद के बेटे समेत अन्य युवाओं के घायल होने की भी चर्चा है।

शिमला जिले के ठियोग की रहने वाली शरण्या वर्मा, जो दिल्ली में एमए की पढ़ाई कर रही हैं, भी इस प्रदर्शन का हिस्सा थीं। शरण्या ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में लिया था। उनका कहना है कि देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से युवा वर्ग निराश और हताश है तथा इस पूरे मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

बिलासपुर से प्रदर्शन में पहुंचे रजनीश ने बताया कि हिमाचल के कई जिलों के छात्र इस आंदोलन में शामिल हुए थे। उनके अनुसार पुलिस कार्रवाई के दौरान कई छात्रों को चोटें आईं, जिससे प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

इधर, दिल्ली की घटना के विरोध में शिमला में भी आवाज उठी। रिज मैदान पर सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने एक दिवसीय शांतिपूर्ण सांकेतिक धरना देकर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर आघात बताते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

धरने के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता रवि कुमार दलित ने कहा कि छात्रों पर बल प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि छात्रों की न्यायसंगत मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा कराने, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, कथित लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई। धरने में आंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष प्रितपाल सिंह मट्टू सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।